दिल्ली, दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि किसी पत्नी को अपने पति पर विवाहेतर संबंध (अडल्टरी) का संदेह है, तो वह पति और उसके कथित प्रेमी/प्रेमिका के कॉल डेटा रिकॉर्ड्स (CDR) और लोकेशन डिटेल्स प्राप्त करने का अधिकार रखती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये रिकॉर्ड्स ऑब्जेक्टिव (वस्तुनिष्ठ) होते हैं और विवाह संबंधी विवादों में सत्यापन और न्यायिक प्रक्रिया में मदद करते हैं। यह आदेश जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ ने सुनाया, जब उन्होंने उस याचिका पर विचार किया जिसमें पति और उसकी कथित प्रेमिका ने फैमिली कोर्ट के अप्रैल 2025 के आदेश को चुनौती दी थी।
फैमिली कोर्ट का आदेशपहले फैमिली कोर्ट ने पत्नी की याचिका मंजूर की थी। पत्नी ने मांग की थी कि उसके पति और उनके कथित प्रेमी की लोकेशन डिटेल्स तथा पति के कॉल रिकॉर्ड्स को सुरक्षित रखा जाए और आवश्यकता पड़ने पर उपलब्ध कराया जाए। पत्नी ने यह तर्क दिया कि इन रिकॉर्ड्स के बिना विवाहेतर संबंध का सबूत प्रस्तुत करना असंभव है। इस दंपति की शादी अक्टूबर 2002 में हुई थी और उनके दो बच्चे हैं। पत्नी ने 2023 में तलाक की याचिका दायर की थी, जिसमें उसने पति पर विवाहेतर संबंध और क्रूरता का आरोप लगाया। याचिका में कहा गया कि पति और उसकी कथित प्रेमिका ने कई बार एक साथ यात्रा की और उनका संबंध लंबे समय से चल रहा है। फैमिली कोर्ट ने 29 अप्रैल, 2025 को पत्नी की याचिका मंजूर करते हुए पुलिस और टेलिकॉम कंपनियों को आदेश दिया कि वे जनवरी 2020 से अब तक की संबंधित जानकारी को सुरक्षित रखें।
प्रेमिका और पति की चुनौतीपति की कथित प्रेमिका ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने तर्क दिया कि फैमिली कोर्ट का आदेश अवैध है और व्यक्तिगत गोपनीयता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पत्नी का उद्देश्य केवल उन्हें परेशान करना और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना है। पति ने अपनी याचिका में कहा कि पत्नी ने विवाहेतर संबंध का कोई प्राथमिक सबूत प्रस्तुत नहीं किया है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि केवल टेलीफोन कॉल या मोबाइल टावर की निकटता से विवाहेतर संबंध स्थापित नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट का तर्कहाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को सही ठहराया और 2003 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले शारदा बनाम धर्मपाल का हवाला दिया। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि व्यक्तिगत गोपनीयता में सीमित हस्तक्षेप तभी वैध है जब यह सत्य सामने लाने और न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हो। कोर्ट ने अपने 32-पृष्ठ के आदेश में कहा, “CDR और टावर लोकेशन डेटा का खुलासा किसी अटकल या खोजी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह सीधे दायर याचिकाओं से संबंधित है। टेलिकॉम ऑपरेटरों द्वारा बनाए गए ये रिकॉर्ड्स वस्तुनिष्ठ हैं और यह परोक्ष सबूत के रूप में काम कर सकते हैं, बिना निजी संचार के वास्तविक कंटेंट का उल्लंघन किए।” कोर्ट ने आगे कहा, “शारदा बनाम धर्मपाल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीमित हस्तक्षेप की अनुमति दी थी ताकि विवाहिक विवादों में सच सामने आ सके। यही सिद्धांत CDR और लोकेशन डेटा पर लागू होता है, जो न्यायिक निर्णय में सहायक साबित हो सकते हैं।”
न्यायिक दृष्टिकोण और महत्वयह फैसला इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि इसमें न्यायालय ने व्यक्तिगत गोपनीयता और पारिवारिक विवाद में सत्यापन के बीच संतुलन बनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कॉल रिकॉर्ड्स और लोकेशन डेटा केवल तथ्यात्मक जानकारी हैं और इनका उद्देश्य केवल साक्ष्य प्रदान करना है, न कि किसी की गोपनीयता में अतिक्रमण करना। विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला पारिवारिक न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और तथ्यात्मक प्रमाण की भूमिका को बढ़ावा देता है। विवाहेतर संबंध के आरोपों में आरोपित व्यक्ति को बिना प्रमाण के दंडित करना न्यायिक दृष्टि से अनुचित है, और इस तरह के ऑब्जेक्टिव रिकॉर्ड्स आरोप-प्रत्यारोप को निष्पक्ष तरीके से जांचने में मदद करते हैं। दिल्ली हाईकोर्ट का यह आदेश आधुनिक न्याय प्रणाली में परिवार और व्यक्तिगत गोपनीयता के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है। यह पत्नी को यह अधिकार देता है कि वह न्यायिक प्रक्रिया में सत्य को सामने लाने के लिए आवश्यक प्रमाण जुटा सके। वहीं, कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित किया कि व्यक्तिगत गोपनीयता का उल्लंघन न हो और डेटा केवल विवेचना और न्यायिक प्रक्रिया तक सीमित रहे। इस निर्णय से यह स्पष्ट हुआ कि विवाहेतर संबंध के मामले में केवल आरोप या अटकलों पर आधारित कार्रवाई करना न्यायालय द्वारा स्वीकार्य नहीं है। तथ्यों पर आधारित प्रमाण जुटाना और उसका निष्पक्ष मूल्यांकन करना ही न्याय की प्रक्रिया का आधार है। इस प्रकार का निर्णय भविष्य में पारिवारिक विवादों और तलाक मामलों में दिशा-निर्देश प्रदान करता है, जहां डिजिटल डेटा एक निर्णायक साक्ष्य के रूप में काम कर सकता है।
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